प्रोफ़ाइल
湯川秀樹(ゆかわ ひでき、1907-1981)は、日本初のノーベル賞受賞者(1949年、物理学賞)。1934年に「中間子」の存在を理論的に予言し、素粒子物理学の礎を築いた。晩年は核兵器廃絶を訴え、1955年にラッセル=アインシュタイン宣言に署名した。
हिदेकी युकावा (Hideki Yukawa, 23 जनवरी 1907 – 8 सितंबर 1981) एक प्रतिष्ठित जापानी सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी थे, जिन्हें 1949 में “मेसॉन सिद्धांत” के लिए भौतिकी में नोबेल पुरस्कार मिला — वे नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले जापानी नागरिक थे। वे टोक्यो में जन्मे, क्योटो में पले-बढ़े, और क्योटो इम्पीरियल विश्वविद्यालय से स्नातक हुए। बाद में उन्होंने ओसाका विश्वविद्यालय और क्योटो विश्वविद्यालय में शोध कार्य किया।
अक्टूबर 1934 में, देर रात एकांत में विचार करते हुए युकावा को एक महत्वपूर्ण विचार आया: परमाणु नाभिक में प्रोटॉन और न्यूट्रॉन को एक साथ बाँधने वाला बल एक नए, अज्ञात कण द्वारा वाहित होता है — जिसे उन्होंने “मेसॉन” नाम दिया और अनुमान लगाया कि इसका द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन से लगभग 200 गुना अधिक होगा। शुरू में वैज्ञानिक जगत ने इसे संदेह से देखा, लेकिन 1947 में ब्रिटिश भौतिकविद् सेसिल पावेल और उनके सहयोगियों ने π मेसॉन की खोज कर इस भविष्यवाणी को सिद्ध किया।
नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने के बाद, युकावा परमाणु निरस्त्रीकरण और विश्व शांति के लिए समर्पित हो गए। 1955 में उन्होंने अल्बर्ट आइंस्टीन, बर्ट्रेंड रसेल और अन्य वैज्ञानिकों के साथ “रसेल–आइंस्टीन घोषणापत्र” पर हस्ताक्षर किए। उनकी आत्मकथा “तबीबीतो” (यात्री, 1958) उनकी वैज्ञानिक यात्रा और मानवता के प्रति उनकी गहरी चिंता को दर्शाती है। जो अभी तक किसी ने नहीं देखा था, उसे सैद्धांतिक रूप से देखने का उनका साहस आज भी वैज्ञानिकों को प्रेरित करता है।