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渋沢栄一(しぶさわ えいいち)は、1840年に武蔵国血洗島村(現・埼玉県深谷市)に生まれた実業家・思想家。幕末に一橋徳川家に仕え、明治政府の大蔵省で日本の近代的金融制度の整備に尽力した後、1873年に第一国立銀行(現みずほ銀行の源流)を設立。生涯で約500の企業・団体の設立・育成に関わり、「日本資本主義の父」と称された。著書『論語と算盤』で「道徳経済合一説」を唱え、倫理と経済は両立するという思想を広めた。2024年発行の新1万円札の肖像に採用。1931年没、享年91歳。

एइची शिबुसावा (1840–1931) एक जापानी उद्योगपति, विचारक और समाज सुधारक थे, जिन्हें “जापानी पूंजीवाद के जनक” के रूप में जाना जाता है। उनका जन्म मुसाशी प्रांत (वर्तमान सैतामा प्रीफेक्चर के फुकाया शहर) में एक कृषक परिवार में हुआ था। एदो काल के अंत में वे सोनो जोई आंदोलन में शामिल हुए और बाद में हितोत्सुबाशी परिवार की सेवा में वित्त और प्रशासन की व्यावहारिक शिक्षा प्राप्त की। 1867 में पेरिस विश्व प्रदर्शनी में भाग लिया और पश्चिमी आधुनिक बैंकिंग एवं औद्योगिक प्रणाली से प्रभावित हुए।

मेइजी पुनर्स्थापना के बाद वे वित्त मंत्रालय में शामिल हुए और जापान की आधुनिक वित्तीय संरचना निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1873 में सरकारी सेवा छोड़कर उन्होंने प्रथम राष्ट्रीय बैंक (दाई-इची कोकुरित्सु गिंको, वर्तमान मिज़ुहो बैंक के पूर्वज) की स्थापना की। जीवनकाल में उन्होंने लगभग 500 कंपनियों और संस्थानों की स्थापना या विकास में भाग लिया — जिनमें टोक्यो गैस, ओसाका स्पिनिंग, साप्पोरो ब्रूअरी और इंपीरियल होटल शामिल हैं। उनकी “गाप्पोन-शुगी” (सहकारी पूंजीवाद) की अवधारणा में धन का व्यापक वितरण और सामूहिक भागीदारी पर जोर था।

1916 में प्रकाशित उनकी प्रसिद्ध पुस्तक “रोंगो टो सोरोबान” (Analects and the Abacus) में उन्होंने तर्क दिया कि कन्फ्यूशियस की नैतिकता (Analects) और वाणिज्यिक उद्यम (Abacus) एक-दूसरे के विरोधी नहीं बल्कि स्वाभाविक साझेदार हैं। उन्होंने सामाजिक कल्याण कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाई। 1931 में 91 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ। 2024 में उनका चित्र जापान के नए 10,000-येन नोट पर अंकित किया गया।