時代: 明治
मेरा आचरण मेरा अपना है; प्रशंसा और निंदा दूसरों की बात है, मुझसे इसका कोई सरोकार नहीं।
संसार में मनुष्य का जीना बस इतना ही है कि सच्चे और सीधे मन से वर्तमान का सामना करे।