पृष्ठभूमि
यह जापान के मेइजी काल में 1872 में प्रकाशित गकुमोन नो सुसुमे की प्रारंभिक पंक्ति है। फुकुज़ावा युकिची ने कहा कि सामाजिक भेद जन्म से नहीं, बल्कि ज्ञान और परिश्रम से तय होते हैं।
आज के लिए सीख
समाज में स्थान जन्म या कुल से नहीं, बल्कि अर्जित ज्ञान से निर्धारित होती है। शिक्षा और समानता का यह संदेश 150 से अधिक वर्षों बाद भी उतना ही प्रासंगिक है।
अर्थ
「आकाश ने किसी को किसी के ऊपर नहीं बनाया, न किसी के नीचे」—फुकुज़ावा युकिची ने अपनी कालजयी रचना गकुमोन नो सुसुमे की शुरुआत इन शब्दों से की, जो मेइजी जापान में समानता की आधुनिक भावना का बीज बोने वाले बन गए।
एक निम्न समुराई परिवार में जन्मे युकिची ने स्वयं के ज्ञान-अर्जन से यह सीखा: जन्म नहीं, विद्या ही असली माप है।